कौन थी रानी दुर्गावती

आज आपके सामने पेश है !बुंदेलखंड की एक और महारानी की वीरता की कहानी जिनका नाम था रानी दुर्गावती नाम तो सुना ही होगा !
बुंदेलखंड में कालिंजर दुर्ग(बांदा)

अपनी विशालता व भब्यता के लिए प्रसिद्ध है!यहाँ के राजा कीर्ति सिंह की पुत्री थी रानी दुर्गावती !उनका जन्म 1540 के आस-पास हुआ था !
बालिका दुर्गा ने बचपन से ही अस्वा रोही व सस्त्र संचालन तथा तेराकी में निपुरता प्राप्त कर ली थी !तीर भाले व बन्दुक का निशाना उनका अचूक था !शेरो का आमने सामने शिकार करना उनका महत्वपूर्ण शौक था ! जो लोगो को आश्चर्य में ड़ाल देता था !बालिका दुर्गा बचपन से ही महादेव की बड़ी भक्त थी! और उनकी एक बहुत अच्छी सहेली थी जिनका नाम था रामचेरी ! दुर्गावती अपनी सहेली रामचेरी के साथ प्रतिदिन कालिंजर दुर्ग के सातवे द्वार महादेव द्वार के समीप नील्कंठेस्वर जी के मंदिर में पूजा अर्चना के लिए जाया करती थी !महाराजा कीर्ति सिंह चंदेल वंश के थे !वे रानी दुर्गावती का विवाह पथा के कुवर वीरभद्र सिंह के साथ करना चाहते थे !पर् दुर्गावती महाराज दल्पतिशाह की वीरता व पराक्रम से प्रभावित होकर मन ही मन उन्हें पति रूप से स्वीकार कर चुकी थी !पिता कीर्तिसिंह इस विवाह के विरुद्ध थे ! इसलिए दुर्गावती ने माना पंडित के माध्यम से अपना एक पत्र दलपति शाह को भेजा !दुर्गावती का पत्र पाकर दलपति शाह 12 हज़ार सैनको के साथ कालिंजर के दक्षिण
में मोर्चा जमाकर बैठ गए !उनके आने का समाचार सुनकर दुर्गावती अपनी सहेली के साथ सुरंग के रास्ते दुर्ग से निकलकर दलपति शाह के सिविल में जा पहुची!माना पंडित ने कन्यादान किया !इस तरह जब से रानी दुर्गावती गढ़ा की महारानी दुर्गावती कहलाई!कुछ समय बाद कीर्तिसिंह ने भी इस विवाह को स्वीकार कर लिया !एक वर्ष बाद रानी दुर्गावती को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई !उसका वीर नारायण रखा गया ! 4 वर्ष बाद महाराज की मौत हो गयी जिसके बाद रानी को वैधभ्य का जीवन जीना पड़ा !इसी बीच शेरशाह सूरी ने रानी दुर्गावती के मायके कालिंजर का घेराव कर लिया ! जिसके कारण युध्द हुआ ! व महाराज़ कीर्ति सिंह वीरगति को प्राप्त हुए !यह रानी दुर्गावती को दूसरा बड़ा आघात था ! रानी गढा दुर्ग में रहती थी ! उनका महल पांच मंजिला था व बहुत ही सुन्दर था !उनके राज्य की उन्नति को सुनकर मानिकपुर के फोजदार ने 1563 में राज्य को तहस नहस कर उस पर् हमला कर दिया !यह हमला मुग़ल बादशाह अकबर की तरफ से कराया गया !दूसरे दिन भीसर लड़ाई हुई !वे घोड़े की लगाम को अपने दातो में लिए हुए !उनके साथ में उनके बायीं ओर राम्चेरी ओर उनके पीछे उनका पुत्र था ! वे मुग़ल सेना को गाजर मूली की तरह काटती चली गयी !पर् उनका पुत्र व उनकी सहेली वीर गति को प्राप्त हुई !यह सब देखकर रानी को चक्कर आ गया!व एक तीर उनकी आख को छेद गया !व उनकी गर्दन को छेद गा गया !व रानी वीर गति को प्राप्त हुई !
गनु महावत जो की रानी का बहुत सेवक था उसने उन तीनो की देहो को उठाकर सरमन नामक हाथी के होदे में डाला !हाथी सूड़ में बाध्ही जंजीर को घुमाता हुआ सर्भाग में गढा से पांच कोस दूर ले गया !
वहा बनी उनकी समाधि आज भी उनकी याद दिलाती है !
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